देख रहा था मैं उसे देख रहा था, जो मुझे नहीं देख रहा था वो किसी को देख रहा था । मेरा किसी और को देखना, किसी और का उसे देखना। वो जिसे देख रहा था , वो उसे ही देख रहा था। कोई और ये देख रहा था, के मैं उसे देख रहा था। जो मुझे नहीं देख रहा था, जो किसी और को देख रहा था। वो मुझे नहीं देख रहा था, पर मैं देख रहा था । के एक वो है जो, सब देख रहा था । इंशपा इलाहाबादी
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बाकी है
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" बाकी है" अभी आंच से डर गए, अभी तो आग बाकी है। दर्द ही हर्फ बन गए, अभी तो अनुराग बाकी है। अभी तो लड़खड़ा के, हमने चलना सीखा है। अभी एक दौड़ बाकी है, अभी एक भाग बाकी है। अंधेरी रात होती है , सितारे टिमटिमाते हैं। अभी सोया हुए सूरज के, सुबह की जाग बाकी है। अभी आंच से डर गए, अभी तो आग बाकी है। ✍️ _ इंशपा इलाहाबादी