"मज़ा आए"

Pramod Kumarप्रमोद कुुमार इंशपा


तुम जब देख के शरमाओ तो मज़ा आए,
छूके मुझको खुद घबराओ तो मज़ा आए।

तबीयत हरी हो जाए तेरी इक निग़ाह से,
पास आके लिपट जाओ तो मज़ा आए।

सरकता आंचल उफ्फ ये जोबन तुम्हारा,
अपनी उंगलियां फिराऊं तो मज़ा आए।

तुम हो कमरे में और रोशनी कोने कोने में,
बत्तियां खुद ही बुझाओ तो मज़ा आए ।

नज़रें झुकाए हो और कुछ बोलते भी नहीं,
होंठों से होंठो पे करो गुदगुदी तो मज़ा आए।

डर जाता है दिल कभी करीब से गुजरें तो,
आज तुम हद से गुजर जाओ तो मज़ा आए।

         ............✍️इंशपा इलाहाबादी

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